होली पर्व के अवसर पर कालेजों में अनुदान की भुगतान नहीं होने से आक्रोष – प्रोसेसर सीता कुमारी

बिहार 05 मार्च 2019

आर .के राय की रिपोर्ट ।

पटना( बिहार) : बिहार में डबल इंजन की सरकार यानी नीतीश कुमार – मोदी की न्याय के साथ सबका विकास का नारा धोखा और झूठ के सिवा कुछ नहीं है.
यह बातें आज यहां बिहार राज्य संबंध डिग्री महाविद्यालय शिक्षक नेता प्रोफेसर सीता कुमारी ने एक संवाददाता पत्रकारों से बातचीत में कहीं.
राज्य में करीबन 250 संबंध डिग्री महाविद्यालयो के शिक्षक एवं कर्मचारी का अनुदान की राशि वर्ष 2012 से आजतक बकाया है साथ ही स्थानीय स्तर पर महाविद्यालयों के प्रबंधक एवं सचिव द्वारा मिलने वाली वेतन या अनुदान भी होली के अवसर पर नहीं दिए जाने से करीबन 10000 कर्मियों में मायूसी छाया हुआ है.
यही है नीतीश कुमार -मोदी की सुशासन का नमूना है. बिहार और देश में विकास की गति है जहां शिक्षक और कर्मचारी का 6 वर्षों से वेतन और अनुदान की राशि बकाया है. जिस कारण शिक्षकों एवं कर्मचारियों के बच्चों की भविष्य अंधकार में होता जा रहा है और हो गया है. कई शिक्षक और कर्मचारी पैसे के अभाव में इलाज के क्रम में अब अपना जीवन लीला समाप्त कर दिया है कई शिक्षक और कर्मचारी बैंकों से कर्ज के कारण डूब गए हैं, बैंकों के नोटिस दिए जाने से परेशान देखे जा रहे हैं . शिक्षक और कर्मचारी को बैंकों से मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए आश्वासन कि कॉलेज शिक्षकों को अनुदान की राशि दी जाएगी. फिर भी समय पर नहीं दिए जाने से शिक्षक और कर्मचारियों की स्थिति नाजुक होती जा रही है.
वाह रे! बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार!!
बिहार में केवल ऐसे योजनाओ राशि आमंत्रण किए जाते रहे हैं जिसने 40 से 45% कमीशन के रूप में किसी न किसी प्रकार से बिहार के मुखिया तक पहुंच जाती है .
राज्य के शिक्षक कोटा के एमएलसीएवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए एमएलसी चुप्पी लगाए बैठे हैं ,राज्य के विधायकों एवं एमएलसी को भी राज्य के शिक्षकों की चिंता नहीं ,केवल अपना वेतन भत्ता और कमीशन लेने में व्यस्त देखे जा रहे हैं.
कुछ दिन पहले आपने देखा होगा कि बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी के वेतन बैंकों में आने में विलंब हुआ तो राज्य के तमाम समाचार पत्रों में प्रमुखता: से खबर छपी थी ,लेकिन बिहार के भविष्य बनाने वाले शिक्षकों एवं कर्मचारियों को 2012 से अनुदान की राशि भुगतान नहीं की जाने की खबर पर किसी का ध्यान नहीं पड़ रहा है क्योंकि अनुदान की राशि या वेतन में कमीशन नहीं मिलता है, जिस कारण सरकार को कहने वाले कोई नहीं है और ना ही सरकार के अधिकारियों का ध्यान इस तरफ है वाह रे सुशासन.

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