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आजादी के नायक और त्याग एवं समर्पण की मुर्ती थे सिरहुल्ली के सिंहेश्वर प्रसाद

दरभंगा

09 अगस्त 2022

रिपोर्ट राहुल कुमार झा “विक्की”

 

 

1942 के स्वाधीनता संग्राम से पूर्व ही सिंहवाड़ा की धरती के कई गुमनाम क्रांतिवीर सपूतों ने स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी अंग्रेजी हुकूमत के विरोध में आंदोलन चलाकर भारत को स्वतंत्र कराने में अपनी भूमिका निभायी।उस समय में रेलवे स्टेशन में लूट या रजिस्ट्री ऑफिस पर कब्जा या अंग्रेज़ी अफसर की हत्या इनलोगों ने अग्रणी भूमिका निभायी. आज सिंहवाड़ा की धरती अपने सपूतों के विमलकीर्ति से गौरवान्वित है इन्हीं में से सिंहवाड़ा प्रखंड के टेकटार पंचायत के निवासी सिंहेश्वर प्रसाद और उनकी पत्नी उर्मिला देवी नाम उस जमाने के अग्रणी स्वाधीनता सेनानी में लिया जाता था लक्ष्मण प्रसाद आजादी के कुछ वर्ष बाद ही स्वर्ग सिधार गये उन्हें या उनके परिजनों को पेंशन तक नसीब नहीं हो सका और सिंहेश्वर प्रसाद ने पेंशन लेने से मना कर दिया।

कहा जाता है पंडित नेहरू भी पहुंचे थे सिरहुल्ली

सिरहुल्ली गांव निवासी स्वाधीनता सेनानी रहे सिघेश्वर प्रसाद समर्पण और त्याग की मूर्ति थे. 109 वर्ष की अवस्था में इनका निधन वर्ष 2010 में हुआ, जमींदार परिवार में जन्मे, तीसरी कक्षा तक पढ़ाई के बाद इन पर स्वाधीनता का भूत इस कदर सवार हुआ की इन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लोगों को संगठित करने में जुट गये. जगह-जगह सभा का आयोजन कर अंग्रेजों के विरोध में नारे बुलंद करने लगे. प्रसाद दंपति कई बार जेल गये, क्षेत्र में चलाये गए तरकट्टी आंदोलन के समय एक अंग्रेज दरोगा की हत्या के जुर्म में 480 एकड़ जमीन अंग्रेजों ने जब्त कर ली अंग्रेजी हुकूमत के आदेश से डरकर गांव वालों ने इनका हुक्का-पानी बंद कर दिया करीब छह माह तक कमला नदी के किनारे भटकते रहे, फल फूल और चोरी छिपे मिलने वाले खाद्य पदार्थ खाकर नदी का पानी पीकर, पति-पत्नी बड़े आंदोलन की रूप रेखा तैयार करते रहे सहयोगियों के माध्यम से कई घटना को अंजाम तक पहुंचाने में कामयाब रहे. आज भी इलाके के लोग उत्साहित और वीर सपूतों को याद कर जवाहरलाल नेहरू भी एक बार सिरहुल्ली आये थे आज भी इनके ग्रामीण गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं, उन्हें नमन करने को तैयार है।बताया जाता है की 1932 में मुहम्मदपुर खादी भंडार में भारत छोड़ो आन्दोलन से जुड़े स्वाधीनता सेनानी की बैठक हुई की जिसमें आचार्य जेबी कृपलानी, जय प्रकाश नारायण, राम लोहिया कुठ शुक्ला, पंडित राम नंदन मिश्र आदि कई नामचीन हस्ती पहुंचे भोजन की व्यवस्था सिरहुल्ली में थी राम मनोहर लोहिया, कर्पूरी ठाकुर जयप्रका नारायण कई बार सिरहुल्ली आए थे,आजादी के बाद तत्तकालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इन्हें ताम्रपत्र से नवाजा इसके बाद सम्मान स्वरुप कुछ राशि लेने लगे।आज भी ताम्रपत्र इनकी बेटी के पास भागलपुर में है

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