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श्रीमद् बाल्मीकीय रामायण नवाह ज्ञान यज्ञ में उमड़ रही भक्तों की भीड़ – मिथिला सिटी न्यूज़

गया 18 नवम्बर 2018

समस्तीपुर / गया ( राजेश कुमार झा ) : श्री श्री 108 श्री स्वामी रंगरामानुजाचार्य जी महाराज मानपुर के लखीबाग में चल रहे रामायण नवाह ज्ञानयज्ञ के चौथे दिन प्रवचन करते हुए बताया कि वशिष्ट जी ने राजा दशरथ से कहा कि यह रहस्य देवों से भी गुप्त रखने योग्य है, यह किसी से मत कहना। तुम्हारे पुत्र श्री राम साधारण मानव नहीं हैं यह साक्षात पुराण पुरुष परमात्मा लक्ष्मी माया से मानव रूप में प्रकट हुए हैं।

पृथ्वी के भार उतारने के लिए ब्रह्मा जी की प्रार्थना पर कौशल्या के गर्भ से तुम्हारे पुत्र रूप में आए हैं। तुम पूर्व जन्म में कश्यप थे और कौशल्या देव माता अदिति । उस समय आप दोनों बहुत वर्षों तक विषयों से विरक्त होकर भगवान विष्णु के पूजन तथा उनके ध्यान में तत्पर रहकर कठिन तप किए थे। उससे भक्तवत्सल भगवान विष्णु ने आप दोनों पर प्रसन्न होकर कहा वर मांगो आपने उनसे वरदान में यह मांगा कि आप हमारे पुत्र हो जाएं। इसलिए वे ही भगवान विष्णु इस समय राम के रूप में आप के पुत्र हुए हैं, उनकी सेवा के लिए शेष जी लक्ष्मण के रूप में प्रकट होकर उनके परम सेवक बने हुए हैं। भगवान गदाधर के शंख भरत और चक्र शत्रुघ्न के रूप में अवतरित हुए हैं। योग माया जनक नंदिनी सीता रूप में प्रकट हुई है।

 

विश्वामित्र जी राम से सीता का संयोग कराने के लिए आए हुए हैं यह रहस्य अत्यंत गुप्त है इसे कभी प्रकाशित मत कीजिएगा। वशिष्ट के वचन से राजा दशरथ का भ्रम दूर हुआ, वह बहुत प्रसन्न हुए और राम लक्ष्मण के सिर सूंघ कर विश्वामित्र के चरणों में सौंप दिए। वहीं इस कथा को सुनने के लिए शहर से लेकर गांव के दूर देहात से भी पुरुष एवं महिलाओं का भीड़ बढ़ता ही जा रहा है। यह श्री मद् बाल्मीकीय रामायण नवाह ज्ञान यज्ञ 15 नवंबर से शुरू हुई है जो 23 नवंबर को समाप्त होगी।

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