आज से संपूर्ण बिहार में मोक्षदायिनी पितृपक्ष प्रारंभ

दरभंगा 02 सितंबर 2020

रिपोर्ट : राहुल झा विक्की

दरभंगा : आश्विन कृष्ण प्रतिपदा से लेकर अमावस्या पंद्रह दिन पितृपक्ष के नाम से विख्यात है। इन पंद्रह दिनों में लोग अपने पितरों (पूर्वजों) को जल देते हैं तथा उनकी मृत्युतिथि पर पार्वण श्राद्ध करते हैं। पिता-माता आदि पारिवारिक मनुष्यों की मृत्यु के पश्चात्‌ उनकी तृप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक किए जाने वाले कर्म को पितृ श्राद्ध कहते हैं । भारतीय धर्मग्रंथों के अनुसार मनुष्य पर तीन प्रकार के ऋण प्रमुख माने गए हैं- पितृ ऋण, देव ऋण तथा ऋषि ऋण। इनमें पितृ ऋण सर्वोपरि है।

पितृ ऋण में पिता के अतिरिक्त माता तथा वे सब बुजुर्ग भी सम्मिलित हैं, जिन्होंने हमें अपना जीवन धारण करने तथा उसका विकास करने में सहयोग दिया, प्रतिवर्ष संपूर्ण बिहार समेत अन्य प्रदेशों के लोग पितृपक्ष के लिए गया जाते हैं, गया मोक्ष के लिए सबसे पवित्र स्थान माना गया है, गया में जाने के बाद पितर को मोक्ष की प्राप्ति होती है, परंतु इस बार करोना महामारी को देखते हुए सरकार के द्वारा ऑनलाइन तर्पण की व्यवस्था की गई है।

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