निर्भया गैंगरेप के चारो दोषियों को दी गयी फांसी, मां आशा देवी बोलीं- आज मेरा धर्म हुआ पूरा

दिल्ली 20 मार्च 2020

रिपोर्ट : सनोवर खान/नसीम रब्बानी।

निर्भया के माता पिता फांसी की तारीख तय होने के बाद निर्भया के माता पिता ने कोर्ट परिसर के बाहर मीडिया को इसे न्याय की जीत बताया । 2012 को हुए निर्भया गैंगरेप मामले के चारों अभियुक्तों को 20 मार्च को फांसी दे दी गई। फांसी के बाद निर्भया की मां ने इसे न्याय की जीत बताया।

पहली बार है जब तिहाड़ जेल में कड़ी सुरक्षा के बीच चार दोषियों को एक साथ फांसी दी गई।

फांसी के बाद तिहाड़ जेल के निदेशक संदीप गोयल ने चारों की जांच कर उन्हें मृत घोषित किया।

मुकेश , विनय, अक्षय और पवन ने जेल में क्या किया

जेल में रहने के दौरान अक्षय सिंह ने सबसे ज़्यादा मज़दूरी कमाई। वहीं मुकेश सिंह ने काम न करने का विकल्प चुना, पवन गुप्ता ने मज़दूरी का काम किया

जेल के नियम न मानने के लिए सबसे ज़्यादा बार सज़ा विनय शर्मा की दी गई।

जेल में सात साल तीन महीने रहने के दौरान जेल में नियमों का पालन न करने के लिए विनय को 11 बार, पवन को आठ बार, मुकेश को तीन बार और अक्षय को एक बार सज़ा मिली।

जेल में अक्षय ने 69,000 रूपये , विनय ने 39,000 रूपये और पवन ने 29,000 रूपये कमाए।

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फांसी के बाद किसने क्या कहा
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा कि आज एक उदाहरण कायम किया गया है लेकिन ये काम पहले भी किया जा सकता था।

उन्होंने कहा अब लोगों को पता चलेगा कि भले की सज़ा मिलने में देरी हो लेकिन उन्हें गुनाह करने पर सज़ा ज़रूर मिलेगी।

वहीं दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने कहा कि ये एक ऐतिहासिक दिन है। सात साल बाद निर्भया को न्याय मिला है। बलात्कार करने वालों के लिए इससे कड़ा संदेश जाएगा।

एक साथ दी गई चारों को फांसी
तिहाड़ जेल के निदेशक संदीप गोयल ने बताया कि सवेरे ठीक 5.30 बजे चारों को एक साथ फांसी दी गई।

निर्भया के परिवार ने कहा जारी रखेंगे लड़ाई
फांसी दिए जाने के बाद निर्भया के पिता बद्रीनाथ सिंह ने कहा, देश में महिलाओं के लिए ऐसा क़ानून बने जिससे लोगों को लंबा इंतज़ार न करना पड़े।

निर्भया के मां आशा देवी ने न्यायपालिका का धन्यवाद करते हुए कहा, मैं न्यायपालिका, मीडिया, राष्ट्रपति और आप सबका शुक्रिया अदा करती हूं, सात साल का संघर्ष आज अंजाम तक पहुंचा। आज का दिन हमारे बच्चियों और महिलाओँ के नाम है जब निर्भया को न्याय मिला।

मेरी बच्ची अब नहीं आएगी लेकिन हम अपनी लड़ाई जारी रखेंगे ताकि भारत की महिलाएं अधिक सुरक्षित हों।

आज फांसी होने के बाद मैंने अपनी बेटी की तस्वीर देखी और उससे कहा कि आख़िर तुम्हें इंसाफ़ मिल गया। मैं उसे बचा नहीं पाई, इसका दुख रहेगा लेकिन मुझे उस पर गर्व है, आज मां का मेरा धर्म पूरा हुआ।

इससे पहले दिल्ली के तिहाड़ जेल के बाहर कड़ी सुरक्षा की व्यवस्था की गई थी। जेल के सामने लोगों की भीड़ भी इकट्ठा हो गई थी जिस कारण जेल के गेट बंद कर दिए गए।

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