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बेगुसराय : सोशल मीडिया ने बढ़ाया हिंदी का दायरा : प्रमोद केशरी – मिथिला सिटी न्यूज़ 

बेगुसराय 16 सितम्बर 201

रिपोर्ट  : राजेश कुमार झा ।

बेगूसराय के बखरी में शिक्षक व बुद्धिजीवियों की संस्था ‘अभिनव पहल’ के द्वारा ‘वर्तमान समय में हिंदी का बढ़ता दायरा’ पर परिचर्चा आयोजित की गई । परिचर्चा की शुरुआत करते हुए अध्यक्ष प्रमोद केशरी ने कहा कि हिंदी भारतीयता की पहचान है। यह हमारे हृदय की भाषा है, जो भारत व संसार के किसी भी भाग में रहनेवाले भारतवंशियों को एकता व स्नेह के सूत्र में जोड़ती है। आजके डिजिटल युग में सिनेमा, इंटरनेट, सोशल मीडिया के माध्यम फेसबुक, वाट्सएप, ट्विटर आदि ने हिंदी का दायरा काफी बढ़ा दिया है जिससे हिंदी लोकभाषा, संपर्कभाषा एवं राष्ट्रभाषा से विश्व भाषा बनती जा रही है।

पुस्तकालय के पूर्व अध्यक्ष प्रेम किशन मन्नू ने कहा कि आज विश्व के 30 से अधिक देशों के सौ से अधिक विदेशी विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जाती है। भारतीय जनमानस में हिंदी रग-रग में बसा हुआ है। हर बदलते दौर में हिंदी ने खुद को निखारा है। साहित्य, फिल्म, कला- संस्कृति, ज्ञान – विज्ञान, संचार व बाजार सभी क्षेत्रों में हिंदी ने अपनी महत्ता कायम की है। कुम्हारसों हाईस्कूल के अंग्रेजी विषय के शिक्षक अरूण ठाकुर ने कहा कि भारत में हिंदी को लेकर गुलामी की मानसिकता है। अभिभावक बच्चों को अंग्रेजी स्कूलों में नामांकन कराकर पढ़ाना स्टेटस सिंबल से जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि जो भाव अपनी हिंदी में है, वह अन्य भाषा में नहीं फिर भी झूठे ‌शान की खातिर विदेशी भाषा को हम अधिक तरजीह देते हैं।

प्रधानाध्यापक कृष्ण कुमार चौधरी ने कहा कि आजकी चकाचौंध व स्मार्टफ़ोन की आभासी दुनिया में हमारी बोलियों की मिठास खत्म होती जा रही है। अतः मातृभाषा के इस्तेमाल में हमें कभी भी संकोच नहीं करना चाहिए।भारत में अनेक भाषाएं बोली जाती हैं, लेकिन अपने मन की बात सहृदता से किसी भाषा में की जा सकती है, तो वह है हिंदी। प्रधानाध्यापक बिरंची यादव ने कहा कि हिंदी अंग्रेजी की तरह भ्रमित करने वाली भाषा नहीं है। हिंदी भाषा में शब्दों का वही उच्चारण होता है, जो लिखा जाता है, अतः हिंदी पूर्णतः वैज्ञानिक भाषा है।डॉक्टर विवेक केशरी ने चीन और जापान का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत तब ही तरक्की कर सकता जब वह अपनी राष्ट्रीय भाषा के महत्व को समझे और उसे बढ़ावा दें। डॉक्टर केशरी ने संकल्प व्यक्त किया कि वे किसी भी प्रकार का आवेदन हिंदी में ही करेंगे व दूसरे को भी प्रेरित करेंगे।

प्रमोद पंडित, रंधीर तुलस्यान, जितेंद्र जिज्ञासु व दीपक रजक ने कहा कि हिंदी विश्व की सबसे समृद्ध और सरल भाषा है। हम इसका जितना इस्तेमाल करेंगे, यह उतनी ही समृद्ध होगी। हिंदी को आत्मीय रूप से स्वीकार कर माता की तरह सम्मान करें।संचालन करते हुए सचिव वसंत कुमार ने कहा कि संसार की बड़ी भाषाओं में शुमार हिंदी विश्व बंधुत्व की भाषा है, जिसमें तुलसीदास के साथ रहीम भी हैं।हिंदी प्रत्येक भारतीय में गौरव,गर्व व स्वाभिमान का भाव जगाती है। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए उपाध्यक्ष विनोद विमलेश ने हिंदी को संस्कारों की जननी बताते हुए इसके अधिक से अधिक इस्तेमाल की बातें कही। नीरज कुमार, मनीष गुप्ता विपिन कुमार, मनीष गुप्ता, महेश ठाकुर, गणेश कुमार आदि ने भी हिंदी के महत्व पर अपने विचार रखेते हुए इसके अधिक से अधिक इस्तेमाल करने की अपील की ।

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